Tuesday, November 20, 2018

ग्रंथों में मंगल को कहा गया है पृथ्वी का पुत्र, कर्ज से मुक्ति के लिए करते हैं इनकी पूजा

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवग्रहों में मंगल का विशेष स्थान है। नवग्रह पूजन के समय दक्षिण दिशा में मंगल की स्थापना की जाती है। ऐसा कहते हैं कि मंगल भगवान शिव से उत्पन्न हुआ है। कुछ ग्रंथों में इसे भगवान शिव के रक्त तो कुछ में वीर्य से उत्पन्न बताया गया है। ज्योतिष के अनुसार, यह पूर्व दिशा में उदित होता है और पश्चिम में अस्त। मंगल का एक नाम भौम भी प्रसिद्ध है। नवग्रह मंडल में मंगल को सेनापति माना गया है। पद्मपुराण के अनुसार, मंगल देवता की पूजा से कर्ज से मुक्ति मिलती है।

जानें इनसे जुड़ी खास बातें
ऐसा है इनका स्वरूप
मंगल का स्वरूप अद्वितीय है। शरीर का रंग लाल बताया गया है। शास्त्रों में इनके पुरुष रूप का वर्णन मिलता है। ये अक्सर रथ पर चलते हैं। लेकिन कुछ ग्रंथों में इनका वाहन मेष यानी भेड़ भी बताया गया है।

रक्तमाल्याम्बरधर: शक्तिशूलगदाधर: ।
चतुर्भज: रक्तरोमा वरद: स्याद् धरासूत:॥ - मत्स्यपुराण 94-37

अर्थ- भूमिपुत्र मंगल देवता चतुर्भुज अर्थात इनके चार हाथ हैं। शरीर के रोए लाल रंग के हैं। हाथों में शक्ति, त्रिशूल और गदा है। एक हाथ वरमुद्रा में रहता है।

उत्पत्ति के बाद पृथ्वी ने कराया स्तनपान
मंगल की उत्पत्ति शिव के तेज (वीर्य) से मानी जाती है। भविष्यपुराण में शिव के रक्तबिंदु से और स्कंदपुराण में अश्रुबिंदु से इनकी उत्पत्ति मानी गई है। स्कंदपुराण में इसकी कथा है। कहते हैं भगवान शंकर ने हिरण्याक्ष की विकेशी नाम की कन्या से विवाह किया था। एक दिन वे विकेशी के साथ एकांत में थे। तभी वहां अग्नि आ पहुंचा। इससे शंकर क्रोध से लाल हो उठे। उनकी आंखों से अश्रुबिंदु टपकने लगे। एक अश्रुबिंदु से विकेशी गर्भवती हुई, लेकिन शिव के तेज को वह सह नहीं सकी और वह पृथ्वी पर आ गया। उससे एक पुत्र उत्पन्न हुआ। जिसका लालन-पालन यानी स्तनपान पृथ्वी ने कराया।

मंगल का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष में मंगल ग्रह का विशेष महत्व है। किसी भी राशि पर पहुंचने के आठ दिन पूर्व ही यह फल देना आरंभ कर देता है। मुकदमा, झगड़ा आदि उग्र मामलों में मंगल का ही प्रभाव होता है। मनुष्य शरीर में पेट से पीठ तक का भाग तथा नाक, कान, फेफड़े एवं शारीरिक बल इसके अधिकार क्षेत्र के माने गए हैं। यह मुख्यत: 28 से 32 वर्ष की आयु में व्यक्ति के जीवन पर अपना शुभ अथवा अशुभ प्रभाव दिखाता है।

ग्रह के रूप में परिचय
पृथ्वी से इसकी दूरी लगभग 6,25,00,000 मील है। आकाशमंडल में भ्रमण करते हुए हर पंद्रहवें साल पृथ्वी के निकट आता है। तब इसकी दूरी केवल 3,46,00,000 मील होती है। इसका व्यास 4115 मील है। सूर्य की परिक्रमा यह 687 दिनों में पूरी करता है। इसकी गति में प्राय: परिवर्तन होता है। जब यह सूर्य के पास होता है तब इसकी रफ्तार तेज हो जाती है। सूर्य, चंद्रमा तथा बृहस्पति तीनों मंगल के मित्र ग्रह हैं। लेकिन बुध, राहु और केतु शत्रु हैं। शुक्र और शनि से यह समभाव रखता है।

Friday, November 16, 2018

गाजा तूफान ने तमिलनाडु में मचाई तबाही, 11 लोगों की मौत

अंदेशे और अलर्ट के बीच गाजा तूफान गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात करीब पौने दो तमिलनाडु के नागापट्ट‍नम पहुंच गया जहां उसने खूब तबाही मचाई. तूफान में अब तक 11 लोगों के मारे गए हैं.

गाजा तूफान के असर से हुए लैंडफॉल के दौरान वहां हवा की रफ्तार करीब 90-100 किमी प्रतिघंटा दर्ज की गई. तेज हवा और बारिश के कारण कई जगहों पर भारी नुकसान देखा गया.अब तक मिली जानकारी के अनुसार तूफान में 11 लोग की मौत हो गई. राज्य सरकार ने मारे गए लोगों के परिजनों को 10-10 लाख का मुआवजा देने का ऐलान किया है.
गाजा तूफान ने बीती रात नागापट्टनम और वेदारणयम में दस्‍तक दी. गुरुवार शाम से ही तमिलनाडु के तटीय इलाकों में बारिश और तेज हवाओं का जोर रहा. तेज हवा के कारण नागापट्टनम में कई जगहों पर बड़े-बड़े पेड़ गिर गए. साथ ही कई घरों को काफी नुकसान भी पहुंचा.

वहीं, देर रात चेन्‍नई मौसम विभाग ने जानकारी दी थी कि गाजा समुद्र को पूरी तरह पार कर जमीन पर पहुंच जाएगा. इसके जमीन पर आने के साथ ही इसकी भीषणता समुद्र के ऊपर रहने के मुकाबले कुछ कम होगी और धीरे-धीरे इसमें बढ़ोतरी होगी.

बता दें कि गाजा के खतरे को देखते हुए अब तक करीब 60 हजार से ज्‍यादा लोगों को प्रदेश भर के छह जिलों में स्‍थित 331 राहत शिविरों में पहुंचाया जा चुका है.
गाजा तूफान के गुरुवार देर रात दक्षिण तमिलनाडु तट पार करने का अंदेशा जताया गया था. जिन इलाकों से इसके गुजरने का अनुमान है, वहां हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. 

मौसम विभाग के उप महानिदेशक एस बालाचंद्रन के मुताबिक, नागपट्टिनम और पड़ोस के पुडुचेरी में कराईकल से करीब 140 किलोमीटर दूर खाड़ी के ऊपर गुजर रहे तूफान के गुरुवार की रात कुड्डालोर और पामबन के बीच तट पार करने का अनुमान है, जिसके बाद यह कमजोर हो जाएगा.

कई इलाकों में भारी बारिश

तूफान के पहुंचने के दौरान इसकी रफ्तार 80-90 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है. इसके बाद इसकी रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. तूफान से पहले तमिलनाडु के कई इलाकों  में बारिश शुरू हो गई है, जैसा मौसम विभाग ने आशंका भी जताई थी.